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छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाएं एवं किसान हितैषी फैसले Chhattisgarh government schemes and farmer friendly decisions

छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाएं, किसान हितैषी फैसले, Chhattisgarh government schemes, and farmer friendly decisions,
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 छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाएं, एवं किसान हितैषी फैसले, Chhattisgarh government schemes, and farmer friendly decisions,



मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में विकास के नए छत्तीसगढ़ मॉडल के जरिए राज्य को नई ऊंचाईयां दी है। कमजोर तबके की आजीविका को मजबूत करना और जनता के हाथों में स्वाभिमान के साथ आर्थिक ताकत को सौंपने की रणनीति अपनाई गई। सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री ने राज्य के किसानों को बकाया अल्पकालीन कृषि ऋण और सिंचाई कर माफ कर खेती-किसानी को एक नई संजीवनी देने का काम किया। राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू कर न्याय फैलाने की शुरूआत की गई। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ में खेती समृद्ध और किसान खुशहाली की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।

91 हजार करोड़ की मदद

छत्तीसगढ़ राज्य न्याय योजनाओं के माध्यम से किसानों, पशुपालकों और खेतिहर मजदूरों को आर्थिक संबल दिया गया है। ऐसी कल्याणकारी पहल से 91 हजार करोड़ रुपए की राशि जरूरतमंद लोगों की जेब में डाली गई, जिसके कारण खेत-खलिहानों से लेकर उद्योगों तथा बाजारों में खुशहाली आई है।

संपर्क कृषि ऋण माफी

राज्य के 17 लाख 82 हजार किसानों पर बकाया 9270 करोड़ रूपए का कृषि ऋण माफ किया गया।

सिंचाई कर माफी

17 लाख से अधिक किसानों का 244.18 करोड़ रूपए सिंचाई कर माफ करने के बाद 80 करोड़ रूपए का और बकाया सिंचाई कर जून 2021 तक का माफ किया गया ।

सालाना 900 करोड़ की राहत

5 लाख 81 हजार से ज्यादा किसानों को मुफ्त और रियायती दरों पर बिजली देकर सालाना 900 करोड़ रूपए की राहत दी जा रही है।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी

वर्ष 2018-19 में 80.38 लाख मीटरिक टन धान खरीदा गया और 20 हजार करोड़ रूपए किसानों के खाते में डाले गए। यह रूपए उस समय प्रचलित मूल्य से 8 करोड़ रूपए अधिक थी।

वर्ष 2019-20 में 83.94 लाख मीटरिक टन धान का उपार्जन किया गया और समर्थन मूल्य के साथ-साथ राज्य के 19 लाख किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत 5628 करोड़ रूपए की सीधी मदद आदान सहायता के तौर पर दी गई।

वर्ष 2020-21 में 20.53 लाख किसानों से 92 लाख मीटरिक टन धान का उपार्जन किया गया और राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत 5553 करोड़ रूपए की आदान सहायता दी गई।

खरीफ वर्ष 2021-22 में राज्य के 22.87 लाख किसानों को लगभग 7000 करोड़ रूपए की आदान सहायता राशि का वितरण किया जा रहा है। 21 मई 2022 को प्रथम किस्त के रूप में 1720.11 करोड़ रूपए की आदान सहायता दी गई है।

12 हजार 900 करोड़ की आदान सहायता

बीते दो वर्षों में राजीव गांधी किसान न्याय योजना अंतर्गत राज्य के किसानों को 12 हजार 900 करोड़ रूपए की राशि आदान सहायता के रूप में दी जा चुकी है।

धान खरीदी केन्द्र बढ़े

किसानों की सहूलियत के लिए धान खरीदी केन्द्रों की संख्या 2311 से बढ़ाकर 2484 कर दी गई, जिससे किसानों को धान बेचने में आसानी हो ।


बारदाना सुविधा एवं भुगतान

राज्य में धान खरीदी के लिए बारदाने की कमी के चलते किसानों को धान खरीदी के पहले दिन से ही अपने बारदाने में धान लाने की सुविधा दी गई। किसानों के बारदाने की मूल्य
को भी 18 रूपए से बढ़ाकर 25 रूपए किया गया। बारदाने के लिए किसानों को 63 करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान किया गया है।

अल्पकालीन ऋण में लगातार बढ़ोत्तरी

अल्पकालीन कृषि ऋण लेने वाले किसानों की संख्या तीन सालों के भीतर 3 लाख 40 हजार बढ़ी है। वर्ष 2017-18 में 9.59 किसानों को 3546 करोड़, वर्ष 2018-19 में 10 लाख किसानों को 3692 करोड़, वर्ष 2019-20 में 11.34 लाख किसानों को 4420 करोड़ वर्ष 2020-21 में 12.65 लाख किसानों को 5049 करोड़, वर्ष 2021-22 में 13 लाख किसानों को 5258 करोड़, वर्ष 2022-23 में 5800 करोड़ रूपए के कृषि ऋण वितरण लक्ष्य के विरूद्ध 18 जुलाई तक 4000 करोड़ रूपए का ऋण किसानों को दिया जा चुका है।

पशुपालन और मत्स्यपालन के लिए ॠण

राज्य के किसानों को पशुपालन एवं मत्स्यपालन के लिए क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की योजना 23 फरवरी 2020 से लागू की गई।

पशुपालन के लिए 2 लाख का ऋण 1 प्रतिशत ब्याज पर तथा 2 से 3 लाख का ऋण 3 प्रतिशत ब्याज पर दिए जाने का प्रावधान है। इसी तरह मछलीपालन के लिए एक लाख का ऋण 1 प्रतिशत ब्याज पर तथा 1 से 3 लाख का ऋण 3 प्रतिशत ब्याज पर दिया जा रहा है।

समर्थन मूल्य में दलहन खरीदी

खरीफ वर्ष 2022-23 से प्रदेश में दलहन फसल जैसे मूंग, उड़द, अरहर इत्यादि की खरीदी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी।

कृषि भूमि वापसी


बस्तर के लोहांड़ीगुड़ा में 1707 किसानों को 4200 एकड़ अधिग्रहित भूमि वापस लौटाई गई।

मत्स्यपालन और लाख पालन को कृषि के समान दर्जा दिया गया ।

मत्स्यपालन हेतु उपलब्ध जल क्षेत्र में से 95 प्रतिशत क्षेत्र को विकसित कर 2 लाख से अधिक मछुआरों को लाभान्वित किया जा रहा है। लाख पालन के लिए ब्याज रहित ऋण की सुविधा प्रदान की जा रही है।

ट्रैक्टर खरीदी का बढ़ता ग्राफ

किसी भी इलाके के किसान की आर्थिक समृद्धि का बड़ा प्रतीक ट्रैक्टर होता है। छत्तीसगढ़ में भी किसान समृद्ध हो रहा है। इसका प्रमाण यह है कि राज्य में बीते साल में ट्रैक्टर खरीदी में लगभग साढ़े पांच फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. बीते तीन साल में 78 हजार से ज्यादा ट्रैक्टर किसानों ने खरीदे हैं।

साल 2019 में छत्तीसगढ़ में कृषि कार्य के लिए 25,607 ट्रैक्टर की खरीदी हुई थी। साल 2020 में 24,590 तथा वर्ष 2021-22 में 25,932 ट्रैक्टरों खरीद हुई है।

बैंकों की मांग


छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों के चलते राज्य में कृषि में किसानों की रुचि बढ़ी है। इसी कारण बैंकों की मांग बढ़ी है। समृद्धि बढ़ने के कारण लोग वाहन खरीद रहे हैं। ट्रैक्टर,कार, बाइक आदि गाड़ियों की बिक्री भी बढ़ी और इन वाहनों के शो रुम भी तेजी से खुल रहे है।

छत्तीसगढ़ में सबसे कम बेरोजगारी

छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं का लोग सीधा लाभ ले रहे हैं। राज्य में बेरोजगारी दर भी कम है, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों के अनुसार, मई माह में छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर मात्र 0.7 प्रतिशत रही, जबकि इसी अवधि में देश में बेरोजगारी दर 7.1 प्रतिशत थी। इससे पहले मार्च, अप्रैल 2022 में भी छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर देश में सबसे कम 0.6 प्रतिशत थी।

गन्ना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 271 से बढ़ाकर 355 रूपए प्रति क्विंटल किया गया है।


किसानों को उच्च गुणवत्ता के प्रमाणित बीज दिलाने के लिए कृषक समग्र विकास योजना में 123 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान है।

बस्तर और सरगुजा संभाग सहित 14 जिलों के 25 विकासखंडों में चिराग परियोजना के लिए 200 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है।


इस परियोजना का उद्देश्य पोषण सुरक्षा, किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार तथा कृषि उत्पाद के मूल्य संवर्धन से अतिरिक्त आय सृजित करना हैं।

फसल बीमा योजना के लिए वर्ष 2022-23 के बजट में 575 करोड़ रूपए का प्रावधान तथा खाद्य सुरक्षा मिशन, ड्रिप और स्प्रिंकलर तथा कृषि उपकरणों के लिए 470 करोड़ रूपए का प्रावधान है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए गौठानों को महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करने के लिए यहां बुनियादी अधोसंरचना के विकास हेतु 600 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

राज्य में वर्ष 2022-23 में 12 लाख मीटरिक टन गन्ना खरीदी हेतु 112‌ करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

कृषि बजट में हर साल बढ़ोत्तरी

राज्य के कृषि बजट में साल दर साल वृद्धि कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है। वर्ष 2020-21 में कृषि का बजट 7785 करोड़ था, जो वर्ष 2021-22 में
बढ़कर 8974 करोड़ हुआ । वर्ष 2022-23 में 9272 करोड़ का प्रावधान कृषि के लिए किया गया है।

सिंचाई में वृद्धि

तीन साल में सिंचाई क्षमता 2.68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ी, पहले 10.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती थी, जो अब बढ़कर 13.58 हेक्टेयर हो गई है।

कोदो कुटकी और रागी

समर्थन मूल्य कोदो, कुटकी और रागी की खरीदी करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। छत्तीसगढ़ सरकार ने कोदो- कुटकी का 3000 रूपए प्रति क्विंटल तथा रागी का 3377 रूपए प्रति क्विंटल दर निर्धारित किया है।

10.45 करोड़ से अधिक की मिलेट्स खरीदी

1 दिसंबर 2021 से 15 फरवरी 2022 तक पहली बार राज्य में समर्थन मूल्य पर 34,293 क्विंटल से अधिक कोदो, कुटकी, रागी की खरीदी के एवज में किसानों को 10.45 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया।

किसान और खेती के रकबे में वृद्धि

वर्ष 2017-18 में सिर्फ 15 लाख 77 हजार पंजीकृत किसान थे, जो अब बढ़कर 24 लाख 06 हजार हो गए है। इनमें से 21 लाख 55 हजार किसानों ने धान बेचा है। धान की खेती का रकबा 22 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 30 लाख 11 हजार हेक्टेयर हो गया है। धान खरीदी 56 लाख 88 हजार से बढ़कर 98 लाख मीटरिक टन हो गई है।

राज्य में वर्ष 2018-19 में 80.37 लाख मीटरिक टन, वर्ष 2019-20 में 83. 94 लाख मीटरिक टन, वर्ष 2020-21 में 92 लाख मीटरिक के टन, वर्ष 2021-22 में 98 लाख मीटरिक टन धान का उपार्जन समर्थन मूल्य पर किया गया ।

प्रदेश में धान की उत्पादकता और उत्पादन में रिकार्ड तोड़ वृद्धि हुई है। वहीं हर साल समर्थन मूल्य पर खरीदी का भी नया कीर्तिमान बना है।

वर्ष 2017-18 में सिर्फ 15 लाख 77 हजार पंजीकृत किसान थे, जो अब बढ़कर 22 लाख 66 हजार हो गए। इसमें से 21 लाख 77 हजार किसानों ने धान बेचा है। धान की खेती का रकबा 22 लाख से बढ़कर 30 लाख 11 हजार हेक्टेयर हो गया । धान की खरीदी 56 लाख 88 हजार से बढ़कर लगभग 98 लाख मीट्रिक टन हो गई।

गोधन न्याय मिशन, टी-काफी बोर्ड का गठन किया गया है।

प्राथमिकता में सिंचाई

साढ़े तीन सालों में वास्तविक सिंचाई क्षमता में
2 लाख 68 हजार हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इस साल के बजट में 3323 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

5 एचपी तक के मोटर चलाने वाले किसानों को मुफ्त बिजली देने का फैसला लिया गया है। बजट में 2600 करोड़ का प्रावधान किया गया है।


सिंचाई के लिए बड़े और मध्यम बांधों की क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

सिंचाई के 1705 नवीन कार्यों के लिए 300 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है, इससे 2.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई बढ़ेगी।

सौर सुजला योजना के तहत 5 एचपी तक की क्षमता वाले 15 हजार सौर सिंचाई पम्पों की स्थापना के लिए 416.90 करोड़ तथा प्रधानमंत्री कुसुम योजना अंतर्गत 10 हजार सोलर पम्पों की स्थापना के लिए राज्यांश मद से 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

अभिनव योजना : सुराजी गांव योजना

प्रदेश में जल संरक्षण, पशु संवर्धन मृदा स्वास्थ्य एवं पोषण प्रबंधन को आमजन की सहभागिता से सफल बनाने के लिए सुराजी गांव योजना 2 अक्टूबर 2019 से संचालित है। इस योजना के तहत नरवा (बरसाती नाले) गरवा (पशुधन) घुरवा (कम्पोस्ट खाद निर्माण) और बाड़ी (सब्जी और फलोद्यान) के रक्षण एवं संवर्धन का अभियान प्रारंभ किया गया है।

नरवा कार्यक्रम

राज्य के लगभग 29000 बरसाती नालों को चिन्हित कर इस कार्यक्रम के तहत उनका ट्रीटमेंट कराया जा रहा है। इससे वर्षाजल का संरक्षण होने के साथ-साथ एवं भू-जल स्तर सुधर रहा हैं। किसानों को सिचाई की सुविधा मिलने से राज्य में दोहरी फसलों का रकबा बढ़ा है।

गरवा कार्यक्रम

पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए 10,624 गांवों में गौठान (पशु-डेशेल्टर) के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। जिसमें से 8,408 गांवों में गौठान निर्मित एवं संचालित हैं। यहां पशुओं के चारे एवं पानी का निःशुल्क प्रबंध किया गया है। गौठानों को रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार और आय का जरिया मिला है।

घुरवा कार्यक्रम

इसके माध्यम से जैविक खाद का उत्पादन एवं उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य के गौठानों में एक लाख से अधिक वर्मी टांके के निर्माण की स्वीकृत दी गई है,


जिसमें से 92,170 टांकों का निर्माण कराकर वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन किया जा रहा है। गौठानों में गोधन न्याय योजना के तहत क्रय गोबर से महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा 30 जून 2022 की स्थिति में 16.43 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट, 5.14 लाख क्विंटल सुपर कम्पोस्ट तथा 0.18 लाख क्विंटल सुपर कम्पोस्ट प्लस का निर्माण किया गया है।

बाड़ी कार्यक्रम

ग्रामीणों के घरों से लगी भूमि में फल साग-सब्जियों आदि के उत्पादन से कृषकों को आमदनी के साथ-साथ पोषण सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत राज्य में लगभग 3 लाख व्यक्तिगत बाड़ियों को विकसित किया गया है। राज्य में 3700 सामुदायिक बाड़ी का निर्माण भी कराया गया है, जिसका संचालन महिला स्व-सहायता समूह कर लगभग 8.32 करोड़ रूपए की आय हासिल कर चुके हैं।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना

छत्तीसगढ़ में कृषि के क्षेत्र में पर्याप्त निवेश, कास्त लागत में किसानों को राहत देने तथा फसल उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना खरीफ 2019 से लागू है। फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने हेतु योजनांतर्गत वर्ष 2021 से खरीफ मौसम की सभी फसलों एवं उद्यानिकी फसलों को शामिल किया गया है। इस योजना के तहत खरीफ फसलों, उद्यानिकी फसलों के उत्पादक कृषकों प्रतिवर्ष 9
हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से इनपुट सब्सिडी दी जाती है। धान के बदले अन्य फसल अथवा वृक्षारोपण करने पर 10 हजार रूपए प्रति एकड़ इनपुट सब्सिडी दी जा रही है। वृक्षारोपण करने वाले किसानों को यह इनपुट सब्सिडी तीन साल तक दी जाएगी। बीते दो सालों में राज्य के लगभग 22 लाख किसानों को 12,900 करोड़ रूपए इनपुट सब्सिडी के रूप में दिए गए हैं।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना अंतर्गत प्रथम किस्त के रूप में 21 मई 2022 को राज्य के 22,87,882 किसानों को 1720.11 करोड़ रूपए की इनपुट सब्सिडी दी गई है। जिसमें धान उत्पादक 22,37,704 किसानों को 9 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से 1665.79 करोड़ रूपए तथा अन्य फसल उत्पादक 1.80.264 कृषकों को 58.89 करोड़ रूपए प्रथम किस्त के रूप में दिए गए हैं। इसी तरह धान के बदले अन्य फसल लेने वाले 17815 कृषकों को 10 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से 4.37 करोड़ रूपए तथा वृक्षारोपण करने वाले 206 कृषकों को 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की मान से 6 लाख रूपए की इनपुट सब्सिडी प्रथम किस्त के रूप में दी गई है।

गोधन न्याय योजना

छत्तीसगढ़ में 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन गोधन न्याय योजना की शुरूआत हुई। दो रूपए किलो में गोबर खरीदी की यह योजना काफी लोकप्रिय हुई है। इसकी चर्चा देश-दुनिया में होने लगी है। पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ गांव में रोजगार के नए अवसर सृजित करने वाले इस योजना को देश के कई राज्य अपनाने लगे हैं। गांवों में गौठानों का निर्माण होने से पशुधन को निःशुल्क चारा-पानी का प्रबंध सुनिश्चित हुआ है। इससे खुली चराई प्रथा पर काफी हद तक रोक लगी है। स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण, दोहरी फसलों को रकबे में वृद्धि कम्पोस्ट उत्पादन से खेती की लागत में कमी और
जैविक खेती को बढ़ावा मिला है।

छत्तीसगढ़ राज्य में 30 जून 2022 तक गोधन न्याय योजना के तहत 75 लाख 38 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी के एवज में कुल 150 करोड़ 75 लाख रुपए का भुगतान पशुपालक ग्रामीणों एवं गोबर विक्रेताओं को किया जा चुका है। गौठान समितियों और महिला स्व सहायता समूहों को 143.19 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। गोधन न्याय योजना से 2 लाख 11 हजार से अधिक ग्रामीण, पशुपालक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। गोधन न्याय योजना अंतर्गत गोबर विक्रेताओं गौठान समितियों एवं महिला समूहों को
30 जून 2022 की स्थिति में 293 करोड़ 94 लाख रूपए भुगतान हो चुका है। गौठानों में महिला समूहों द्वारा गोधन न्याय योजना के अंतर्गत क्रय गोबर से बड़े पैमाने पर वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट सुपर कम्पोस्ट प्लस एवं अन्य उत्पाद तैयार किया जा रहा है। महिला समूह गोबर से खाद के अलावा गो-कास्ट, दीया, अगरबत्ती, मूर्तियां एवं अन्य सामग्री का निर्माण एवं विक्रय कर लाभ अर्जित कर रही हैं। गौठानों में क्रय गोबर से विद्युत उत्पादन की शुरुआत की जा चुकी है। गोबर से बिजली बनाने की शुरूआत हो चुकी है। गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए यूनिट्स लगाई जा रही है।

राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के ग्रामीण अंचल के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आर्थिक
सम्बल दान करने के लिए राजीव गांधी ग्रामीण मेहीन कृषि मजदूर न्याय योजना वर्ष 2021-22 से
संचालित की जा रही है। योजनांतर्गत 3.55 लाख हितग्राहियों को प्रति वर्ष 7 हजार रूपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। छत्तीसगढ़ के मूल निवासी ग्रामीण भूमिहीन मजदूर के अंतर्गत चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी पुरोहित जैसे पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक तथा समय समय पर नियत अन्य हितग्राही परिवार के पास कृषि भूमि नहीं इस योजना के लिए पात्र हैं। राज्य के आदिवासी अंचलों में देव स्थलों पर पूजा करने वाले मांझी, बैगा गुनिया, पूजारी हाट पाहर्या, बाजा मोहरिया आदि लोगों को भी लाभ दिया जा रहा है।

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